करे कोई, भरे कोई

5 06 2007


जलवायु परिवर्तन के शोर में वे लोग ज्यादा ग्लानिभाव से ग्रस्त हैं जो पर्यावरण को सबसे कम नुकसान पहुंचाते हैं. मंहगी जीवनशैली के कारण पर्यावरण को सबसे अधिक नुकसान पहुंचाने वाले लोग ही पर्यावरण बचाने के नाम पर अभियान चला रहे हैं.

भारत के लोकजीवन में पर्यावरण संरक्षण निहित है. लेकिन विकास की आंधी और नासमझी के कारण हमारी उस समझ में भी खोट आने लगा है और पर्यावरण संरक्षण की बात करते हैं तो ऐसा लगता है कि कोई नकलची नकल कर रहा है. अच्छा हो कि सुर में सुर मिलाकर महान बनने की बजाय हम अपने स्वभाव के अनुसार व्यवहार करें, इससे पर्यावरण भी बचेगा और हम भी.