गरीबों को 10 हजार में घर

13 06 2007

भारत सरकार के शहरी विकास और गरीबी उन्मूलन  मंत्रालय ने घोषणा की है कि वह ऐसी योजना पर काम रही है जिसके पूरा हो जाने पर शहरी गरीबों को 10 हजार रूपये में घर मिल सकता है. शौचालय, स्नानागार सहित दो कमरों का यह मकान गरीबों को ध्यान में रखकर डिजाईन किया जा रहा है.

पहले चरण में यह योजना दिल्ली, हरियाणा, मध्य प्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र, बिहार, पश्चिम बंगाल, झारखण्ड, पंजाब, हिमाचल, तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश में लागू की जाएगी.

दिल्ली सरकार ने पहल कर दी है और उसने 33 हजार फ्लैट बनावाने का निर्णय लिया है. हर फ्लैट पर लगभग एक लाख 45 हजार का खर्च आयेगा लेकिन यह गरीबों को 90 प्रतिशत रियायत पर आवंटित किया जाएगा.

यह योजना सिरे चढ़ेगी इसमें संदेह है. इसके दो कारण हैं. शहर के किसी भी हिस्से की जमीन अब सस्ती नहीं रह गयी है. दूसरा छोटे स्तर पर काम करनेवाले बिचौलिये इसका फायदा गरीब तक पहुंचने नहीं देंगे. मुंबई में लंबे समय से इस बात की कोशिश चल रही है कि झुग्गियों की जगह लोगों को सस्ते फ्लैट उपलब्ध करा दिये जाएं. लेकिन आज तक यह योजना सिरे नहीं चढ़ पायी है.

शहरों में यह आलम है कि घर खरीदना या बनाना हो तो किसी की भी कमाई पूरी नहीं पड़ती. बिल्डर लॉबी ने बहुत सुनियोजित तरीके से आम आदमी को घर  के सुख से मरहूम कर दिया है. एक आम आदमी अब धरती पर अपने एक टुकड़े के लिए तरस रहा है. सरकार की यह योजना सिरे चढ़ती है और कामयाब रहती है तो निश्चित रूप से आम आदमी का भला होगा.